वाह रे पैसा तेरा कैसा करू बखान,
जिसके पास रहे तू,वह धनवान।
जिसके पास न रहे,वह लागे कंगाल,
दुनिया भर में तेरा ही है,गुनगान।।
अमीरों का सम्मान है,तू और,
गरीबो का अरमान है,तू।
रिश्तो की कद्र अब कहाँ होती है,
पैसा के लिए ही अब रिश्ते दूर होती है।।
न होगा कोई धनवान ,
न मिलेगा किसी को सम्मान।
पैसा तो केवल एक कालरूपी माया है,
यह तो मोह का आसियान है।।
लौहपथगामिनी बनके इसको तो जाना है,
न कोई लाया है,न कोई लेकर जाये ग।
यह तो केवल लोभ था,
जो तेज प्रलोभ था,यह सिर्फ प्रमोद था।।
तेज साहू.
८१२०५५१८२०.