Sunday, 10 April 2016

आज मेरी कलम खो गई...✍.

आज मेरी कलम खो गई'
लगा जैसे सनम खो गई'
वह कैसे खफ़ा हो गई'
या हम से कोई ख़ता हो गई'
क्या जुर्म हुआ है'हम से'
जो कलम हम से दूर हो गई'
हम तो नादान है'
समझो हमसे भूल हो गई'
अब मान भी जाओ'पास तो मेरे आओ'
कभी नहीं होगी'गुस्ताख़ी'
सिर्फ़ एक बार मान जाओ'           
विश्वास कैसे दिलाऊ'
तुम्हे पास कैसे बुलाऊ'
सुन! ऐ हवा पंहुचा दे खबर'
मेरी सनम'कलम तक'
अब करवटें लेना'सजा हो गई'
ऐ हवा कह देना'खबर उस कलम से'
उसे खबर भेज हम बेखबर हो गए'
बस इतना पूछना हम सें क्या?ख़ता हुई'
जो हम सें इतनी दूर हो गई'
आज मेरी कलम खो गई'
ऐ तेज!       
लगा जैसे सनम खो गई'

तेज साहू...✍🏻

No comments:

Post a Comment